Loading

About

About

About

परिचय :

प्रियंका सिंह रावत "जिज्जी"

स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज के नीचे खड़ी प्राथमिक विद्यालय की एक छोटी सी अबोध बालिका राष्ट्रगान समाप्त होते ही इंकलाब ज़िंदाबाद के नारे लगा उठे. उसका रोम रोम कह उठे की देश के लिए जीना है और देश के लिए मरना है देश के लिए कुछ कर गुजरना है. जब ऐसा भाव किसी बच्चे के भीतर पैदा हो इसे आप या तो किसी क्रांतिकारी का पुनर्जन्म कहेंगे या यह समझना गलत न होगा की प्रकृति या ईश्वर ने उस बच्चे की राष्ट्र पुनर्निर्माण में कोई बड़ी भूमिका तय कर रख्खी है. प्रकृति या ईश्वर उस बच्चे से कुछ ऐसा कार्य करवाना चाहते हैं जो समाज को निश्चय ही नई दिशा देगा.बड़े कार्य जिस किसी से प्रकृति या ईश्वर को करवाने होते हैं उनके सर्वतोन्मुखी विकास पर उसकी अपनी नज़र रहती हैं. प्रकृति या ईश्वर उसे वह सारा वातावरण देते हैं जिसमे उसे अनुभव के द्वारा वो  सभी योग्यताएं हासिल हो जाती हैं जिसके जरिये राष्ट्र पुनर्निर्माण होना होता हैं.

सांसद प्रियंका सिंह रावत हैं वो अबोध बालिका जिनके भीतर राष्ट्र प्रेम और समाज के लिए कुछ कर गुजरनें की भावना बचपन से ही हिलोरें  लेती  रहीं. उन्होने  कभी  इन  भावनाओं  को  कभी  किसी  से व्यक्त  नहीं   किया  लेकिन  जब उनका  वह स्वप्न  फलीभूत हुआ तब  उनकी आँखों के सामने  उनके जीवन  के सारे घटनाक्रम घूम  गये. उन्हें भी यकीन हो गया की आखिर बचपन से उन्हे ऐसा वातावरण क्यों दिया जा रहा था. जो सांसद बनाने की तैयारी थी. उन्हें एक दिन सांसद की अहम् भूमिका अदा करनी थी. उन्हें  लगा   की उनका जन्म  दलित  परिवार  में क्यों हुआ? शायद दलित  समाज को  निकट  से समझने  के लिए. उनके हालत कैसे बेहतर हों यह सोचने के लिए उनकी समस्यायों को निकट से समझने के लिए. उनके  हालत  कैसे बदलें  यह योजना और रणनीति  तय करने के लिये .

फिर उन्होने  सोचा की आखिर  क्यों उन्हें  एक प्रशासनिक अधिकारी के घर जन्म मिला? शायद इसलिए की उन्हें विकास के कार्यों की प्रक्रिया किताबों में पढ़ कर न सीखनी पड़े बल्कि रोजमर्रा की ज़िन्दगी से वो प्रशासन सीख सकें. शायद ऐसा ही कुछ सीखने के लिये उनका विवाह भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री रघुनाथ भारती से हुआ. यह सारा घटनाक्रम उनकी ईश्वर या  प्रकृति पर अटूट आस्था का कारण बना . उन्हें लगा की ईश्वर या  प्रकृति  की नज़र अपने हर निर्माण पर हमेशा रहती है. वो हमारी तरह  सीमित मानसिक क्षमता वाला व्यक्तित्व नहीं है बल्कि ईश्वर या  प्रकृति  असीमित बौद्धिक क्षमता वाला व्यक्तित्व है. ऐसे दार्शनिक विचारों पर सांसद प्रियंका का अब पूरा यकीन है.

https://priyankasinghrawat.co.in/wp-content/uploads/2017/10/0101-560x419.jpg

About

About


शिक्षा

यह बात शायद सांसद प्रियंका सिंह रावत और उनके परिजनों को पता नहीं थी की उन्होने भावी सांसद को जन्म दिया हैं. उन्हें यह जरूर अहसास था की प्रियंका कुछ बड़ा कार्य करेंगी. यह कहावत सही हैं की पूत के पांव पालने में ही पता चल जाते हैं. परिजन लोक प्रशासन से ताल्लुक रखते थे तो उन्हें लगा की उनकी बेटी भी भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाएगी. प्रियंका को भी लगा की यदि उसे तेज तर्रार पुलिस अधिकारी बनने को मिल जाय तो शायद उसके भीतर की प्रतिभा का सही उपयोग हो जायेगा. प्रियंका ने उसी प्रकार अध्ययन किया और अपने पिता से लोक प्रशासन भली भाँति सीखने का प्रयत्न किया. पढ़ाई में अव्वल रहने के साथ साथ प्रियंका अन्य गतिविधियों में भी भाग अवश्य लेती थीं.

इसके अलावा प्रियंका को अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं थी. यदि कोई शरारती तत्व किसी सहपाठी को छेड़ता तो प्रियंका से कभी बर्दाश्त नहीं होता था. किसी सहेली के साथ अन्याय दुर्व्यवहार प्रियंका को कभी बर्दाश्त नहीं हुआ उन्होने हमेशा उसका कड़ा विरोध किया. ये अपने से बड़ी उम्र की लड़कियों को परेशान करने वालों से जूझती रहीं इस नाते इन्हें लोग जिज्जी के नाम से पुकारने लगे. उत्तरप्रदेश मैं जिज्जी बड़ी बहन को कहते हैं मगर सांसद प्रियंका को बड़ी उम्र के लोग भी जिज्जी के नाम से पुकारने लगे. यह  सारे  लक्षण एक भावी  तेजतर्रार पुलिस अफसर के भी हो सकते थे इस लिये परिजनों ने इन गुणों को पनपने दिया बल्कि और उन्हें बढ़ावा दिया. रोहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली  से प्रियंका ने  स्नातक, परास्नातक और जनसंचार में डिप्लोमा की पढ़ाई पूरी की. वहां भी ये छात्र राजनीती में सक्रीय रहीं.

एक प्रशासनिक अधिकारी से विवाह होने के उपरांत भी प्रियंका अपने पति से लोक प्रशासन पर रोज चर्चा करती रहीं. उनके बहुत से सुझावों से उनके पति भी सहमत हुआ करते थे. उनके पति को लगता की प्रियंका के खून में लोक प्रशासन हैं इसलिए उनके सुझाव बहुत कारगर साबित होते हैं. वो यह समझते रहे की एक सफल प्रशासनिक अधिकारी की बेटी होने के कारण इनके खून में प्रशासनिक प्रतिभा हैं. उन्होने इस प्रतिभा को निखारने में प्रियंका की पूरी मदद की.

प्रियंका ने अवसर मिलते ही स्वयं को पत्रकारिता के ज्ञान से भी सुसज्जित कर लिया. जनसंचार  मैं महारत हासिल करने का भी अवसर प्रियंका को मिला. सांसद प्रियंका ने विवाह के बाद भी कभी स्वयं को खाली नहीं रख्खा. मौका मिलने पर उन्होने पत्रकारिता यानि जनसंचार भी सीखा. अपने पति श्री रघुनाथ भारती  के नागपुर प्रवास के दौरान उन्होने लेखन सम्पादन का काम भी किया.

उनकी विशेष रूचि सामाजिक विकास में रही. समाज सेवा के कामों में भी उन्होने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. देश की समस्याओं और उनके अलग अलग दर्शन के मुताबिक समाधानों के बारे में ज्ञान  उन्होने भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा की तैयारी के  दौरान हासिल कर लिया था. राजनैतिक दर्शन के अध्ययन के दौरान प्रियंका भारतीय जनता पार्टी और आर एस एस की विचारधारा से हृदय की गहराई तक प्रभावित हुईं. उन्हे लगा की इस राजनैतिक विचारधारा को मानने वाले बहुत से प्रचारक देश और समाज के लिये अपना जीवन कुर्बान कर देते हैं ऐसे संगठन का हिस्सा होना गर्व की बात हैं.

चूंकि पति तथा पिता का व्यवसाय स्थानांतरण अधीन था इसलिए सक्रीय रूप से कोई पदभार ग्रहण कर के भाजपा या आर एस एस का कार्य करपाना उनके लिए संभव नहीं रहा लेकिन जब अवसर मिला प्रियंका ने अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दिया जिसमे भाजपा के धरने और आंदोलनों में प्रियंका अपने विद्यार्थी जीवन से सक्रीय रही. इन्होने कभी संगठन का कोई  पद पाने की बजाय जुझारू जमीन के कार्यकर्त्ता की तरह काम करना बेहतर समझा.


राजनैतिक गतिविधियां

  • २०१४ के अहम् आम चुनाव में भाजपा संगठन ने इन्हें संसदीय चुनाव में कांग्रेस के नामी गरमी उम्मीदवार एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी श्री पी एल पुनिया के खिलाफ चुनाव लड़ने की ज़िम्मेदारी सौंपी. बाराबंकी के भाजपा और आर एस एस कार्यकर्ताओं के लगाव  और जी तोड़ मेहनत के परिणामस्वरुप प्रियंका को व्यापक जीत हासिल हुई. प्रियंका ने अपने प्रतिद्वंद्वी को दो लाख बारह हज़ार (२.१२ लाख) वोटों से हरा दिया. बाराबंकी के भाजपा और आर एस एस कार्यकर्ताओं का प्रियंका के लिये योगदान अविस्मरणीय हैं ऐसा सांसद प्रियंका बार बार कहते नहीं थकती हैं. उनका कहना हैं की चुनाव के पूर्व जिताने में और अब तक कोई दिन ऐसा नहीं गया की कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र के विकास  के कामों में  बढ़ चढ़ कर हिस्सा न लिया हो. आज भी सभी प्रियंका के साथ कंधे से कन्धा मिलकर क्षेत्रीय विकास के कामों में लगे रहते हैं. 
  • भाजपा नेतृत्व ने सांसद प्रियंका में प्रतिभा परख कर खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों की संसदीय स्थाई समिति का सदस्य नियुक्त किया. इसके अतिरिक्त उन्हें महिला एवं बाल कल्याण विभाग की सलाहकार समिति और केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया हैं. इनमे सांसद प्रियंका  द्वारा दिये गए सुझावों को समिति के सदस्यों ने कारगर माना हैं. 
  • २०१४  के दिल्ली  विधानसभा चुनाव में भाजपा नेतृत्व ने सांसद प्रियंका को जनसभाएं करने का कार्य सौंपा जिसे उन्होने पूरी तरह से निभाया. सांसद प्रियंका ने जिला संगठन की महिला सम्मेलनों,पिछड़ा सम्मलेन, युवा सम्मलेन और तिरंगा यात्रा में विशेष योगदान दिया. 
  • सांसद प्रियंका ने बाराबंकी के भाजपा कार्यकर्ताओं के माध्यम से सड़क परिवहन एवं जहाजरानी मंत्री श्री नितिन गडकरी की राष्र्टीय राजमार्ग ५८ सी के शिलान्यास के अवसर पर विशाल जनसभा का आयोजन किया. इस अवसर पर तत्कालीन संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री महेश शर्मा ने बाराबंकी के आठ तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्धार की घोषणा की. 
  • भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह के द्वारा बाराबंकी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण हेतु सम्मलेन का आयोजन सांसद प्रियंका को करने का अवसर मिला.जिसमे बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने चुनाव सम्बन्धी टिप्स समझे. जिसके परिणाम सबके सामने चुनाव के बाद आ ही गए.
  • सांसद प्रियंका को उत्तरप्रदेश विधान सभा चुनाव में भाजपा नेतृत्व ने चुनाव रैलियां आयोजित करने  का मौका दिया. इसमे गृह मंत्री राजनाथ सिंह, श्रीमती अनुप्रिया पटेल और श्री आदित्यनाथ योगी की सभाएं प्रमुख थीं. इन रैलिओं में  बाराबंकी के कार्यकर्ताओं का व्यापक सहयोग मिला और सभी रैलियां सफल हुईं. 
  • सांसद प्रियंका ने ठाना की उत्तरप्रदेश विधान सभा चुनाव में भाजपा नेतृत्व को वह अच्छे से अच्छे परिणाम तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी. उन्होने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह के टिप्स के अनुसार रणनीति बनाई और उसको लागू करने में उन्हें बाराबंकी के कार्यकर्ताओं का सहयोग मिला. परिणामस्वरूप बाराबंकी में भाजपा को ६ में से पांच सीटें मिली. 
  • उत्तरप्रदेश विधान सभा चुनाव में  सांसद प्रियंका को प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी की रैली के आयोजन में विशेष योगदान देने का मौका मिला जो भरपूर सफल रही. 
  • सांसद प्रियंका को उत्तरप्रदेश विधान सभा चुनाव के दौरान प्रदेश में घूम घूम कर धरना और सभा करने का काम भी सौपा गया जिसे स्थानीय कार्यकर्ताओं के माध्यम से उन्होने गोंडा, लखनऊ, बरेली, सीतापुर, सुल्तानपुर, अमेठी, वाराणसी और फैज़ाबाद में सफलतापूर्वक आयोजित करके उन्होने अपनी सफल जननेतृत्व क्षमता का परिचय दिया. साथ ही साथ सांसद प्रियंका ने कभी अपने संसदीय क्षेत्र में हो रहे आयोजनों पर भी पैनी नज़र रख्खी जिसमें उन्हें स्थानीय कार्यकर्ताओं का भी भरपूर सहयोग मिला. 
  • सांसद प्रियंका ने कभी भी भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को नहीं छोड़ा हर बार बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. नए नए सुझावों के साथ बड़ी  से बड़ी  जिम्मेदारी लेने में वो कभी नहीं चूकीं. कार्यकर्ताओं की मदद और मेहनत से उन्हें सदा सफलता ही मिली. 
  • भारतीय जनता पार्टी की उनके जिला स्तर की गतिविधि हो या अन्य किसी स्थान की वो हमेशा पार्टी की गतिविधियों में पूरे मन से सक्रीय रहीं. 

सामजिक गतिविधियां

सांसद प्रियंका स्वयंसेवी संगठन लाडली फॉउण्डेशन की मुख्य संरक्षक हैं जो बगैर किसी सरकारी मदद के सामूहिक विवाह, गरीब लड़कियों के लिए व्यावसायिक शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, हुनर विकास आदि कार्यों में सलग्न है. 

लाडली फॉउण्डेशन के कुछ उल्लेखनीय कार्य हैं:

  • लाडली फॉउण्डेशन ट्रस्ट ने हिन्दू, मुस्लिम तथा अन्य धर्मों की ५६० गरीब  लड़कियों का सामूहिक विवाह कराया जिनके परिवार के पास उनके विवाह के लिये धन नहीं होता जिसके  कारण उनकी बेटियों के विवाह में विलम्ब हो जाता है. जो कई बार शोषण या महिलाओं के प्रति अपराध जैसे बलात्कार आदि की शिकार हो जाती हैं. 
  • लाडली फॉउण्डेशन ट्रस्ट गरीब लड़कियों का सामाजिक स्तर बढ़ाने के लिए हर तीन माह में लगभग २००० लड़कियों को अंग्रेज़ी और कंप्यूटर की शिक्षा प्रदान कर रहा है.
  • लाडली फॉउण्डेशन ट्रस्ट आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को शिक्षा के अलावा उनके जरूरत की चीज़ें जैसे कपड़े और दवाइयां आदि मुहैया कराता रहा है. अनाथालय और वृद्धा आश्रम में सर्दियों में कम्बल आदि के वितरण का कार्य करता रहा है. 
  • सांसद प्रियंका ने स्वयं  आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को ५००० कम्बल लखनऊ और बाराबंकी में वितरित किये. उन्होने बाढ़ ग्रस्त इलाकों में स्वयं जाकर कपड़े, दवाएं, ब्रेड, बिस्कुट एवं अन्य खाने की वस्तुऐं वितरित कीं. 
  • सांसद प्रियंका नेशनल युथ अवार्डीस फेडरेशन ऑफ़ इंडिया की भी मुख्य संरक्षक हैं. इससे देश के तमाम समर्पित सामाजिक कार्यकर्त्ता जुड़े हुए हैं जिन्हें राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पुरस्कारों से केंद्र एवं अन्य राज्य सरकारों  द्वारा नवाज़ा गया है. 

लोक सभा की गतिविधियां

लोक सभा के आंकड़ों के अनुसार सांसद प्रियंका की उपस्थिति ८७ फीसदी रही है. जबकि उपस्थिति का राष्ट्रिय औसत ८० फीसदी रहा है. ये न केवल लोक सभा में उपस्थित रहीं हैं बल्कि इन्होने सक्रीय रूप से रचनात्मक बहस में भाग भी लिया है. इन्होने ३० मुद्दे उठाए जो बाराबंकी जिले और राष्ट्रिय महत्त्व के थे. इनमे से कुछ इस प्रकार हैं. :

  • मेंथा तेल शोध संस्थान की स्थापना बाराबंकी जिले में हो. मेंथा की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्यों की सूची में शामिल किया जाय. 
  • तपेदिक से बचाव और उसकी रोकथाम के बेहतर उपाय किये जाएं. 
  • महंगाई बढ़ने पर हुई चर्चा में शामिल हुईं. 
  • बिहार में दलितों के साथ भेदभाव के खिलाफ कठोर कदम उठाया जाय. 
  • केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं में सांसदों की भूमिका तय करने की जरूरत. 
  • प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना से सम्बंधित सुझाव. 
  • उत्तर प्रदेश को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मुहैया कराय जाने की जरूरत. 
  • बाराबंकी की बिजली समस्या के निदान के लिये सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की जरूरत.
  • बाराबंकी में ट्रामा सेण्टर की स्थापना की जरूरत. 
  • महिला एवं बच्चों के साथ बढ़ते अत्या चारों पर ध्यानाकर्षण.
  • बाराबंकी में उच्च शिक्षा संस्थान स्थापना और केंद्रीय विद्यालय में अपरान्ह पारी की शुरुआत की जरूरत. 
  • देश में बाढ़  और सुखाड़ को लेकर चर्चा. 
  • बाराबंकी में बांध के निर्माण से  बाढ़ से बाराबंकी और प्रदेश को बचाने की जरूरत.

अन्य गतिविधियां

  • १२५ गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को प्रधानमंत्री सहायता कोष से ४.८९ करोड़ रूपए की मदद की सिफारिश की जिसमे ४८ लोग ५६.८६ लाख रूपए की सहायता प्राप्त कर चुके हैं. 
  • जनहित में इन्होने सांसद निधि के माध्यम से १२९६ सोलर  लाइटें, ९१५ हैंडपंप, आवागमन के रास्ते और सात लाख की लगत से स्कूल में बच्चों के लिए विज्ञान प्रयोगशाला, कक्षायें और शौचालय का निर्माण कराया. 
  • सांसद प्रियंका ने तमाम पत्र बैंकों और सार्वजानिक निगमों को लिखे की वे अपने CSR फण्ड से आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लाभार्थ आर्थिक सहायता प्रदान करैं. जिसके तहत ५११ सोलर लाइटें संसदीय क्षेत्र में लगाई गयी. 
  • सांसद प्रियंका ने मानव संसाधन विकास विभाग को बाराबंकी में सरकारी महिला महाविद्यालय खोलने को राजी कर लिया. निर्माण कार्य जारी है. 
  • छोटे से संसदीय कार्यकाल में सांसद प्रियंका ने प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ४५ सड़कों का निर्माण करवाया. निर्माण के दौरान सडकों की गुणवत्ता पर पूरी नज़र रख्खी. 
  • सांसद प्रियंका स्वच्छ भारत अभियान के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए सम्मेलन, चर्चा, बहस और मेले आयोजित करती रहती हैं. 
  • सांसद प्रियंका के प्रयास से राष्ट्रिय राजमार्ग २८ सी और ५६ को चौड़ा करके चार लेन बनाया गया जिसका कार्य पूरा हो चुका है. 
  • सांसद प्रियंका के प्रयासों से बाराबंकी में हैदरगढ़ बाईपास का निर्माण  राष्ट्रिय राजमार्ग ५६ पर हुआ. 
  • सांसद प्रियंका ने उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों के दौरान तीन अलग अलग तारीखों पर लाइव टीवी डिबेट में भाग लेकर पार्टी के विचार और कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला.
  • विभिन्न मौकों पर सांसद प्रियंका न्यूज़ चैनलों को साक्षात्कार और बिट्स देती रहती हैं. 
  • सांसद प्रियंका ज्यादा से ज्यादा समय अपने संसदीय क्षेत्र में रहकर जनसमस्याओं का निदान करती रहती हैं. 

About